नगरोटा सूरियाँ को उपमंडल का दर्जा देने की मांग
जिला कांगड़ा के तहत पोंग झील के सुरम्य तट पर बसे और ‘उभरते’ हुए कस्बे के रूप में अपनी पहचान बना रहे नगरोटा सूरियाँ को उपमंडल (सिविल) का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जनता ने उठाई है। जनता ने सरकार की ‘उदासीनता’ पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर उनके इस जायज मांग के इंतजार को कब पुरा किया जाएगा? लोगों का कहना है कि नगरोटा सूरियाँ भौगोलिक, प्रशासनिक और राजनीतिक, हर लिहाज से उपमंडल बनने का हकदार है। बावजूद इसके, पोंग झील किनारे बसे इस महत्वपूर्ण कस्बे की लगातार हो रही अनदेखी से लोग हैरान और निराश हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि नगरोटा सूरियाँ को उपमंडल का दर्जा मिलता है, तो यह इस इलाके के लिए विकास का सबसे बड़ा तोहफा होगा। अहम सवाल है कि विकास के लिए क्यों जरूरी है दर्जा ? निवासीयों अनुसार, उपमंडल का दर्जा मिलने से यहाँ के विकास को नए पंख लगेंगे। प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को अन्य स्थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उपमंडल का दर्जा होने से स्थानीय स्तर पर मजबूत होने से जनकल्याण की योजनाएं और बेहतर तरीके से लागू हो सकेंगी और आम जनता तक उनकी पहुँच सुगम होगी। पोंग झील के कारण यहाँ पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन उपमंडल स्तर के प्रशासनिक ढांचे के अभाव में यह क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ता जा रहा है।
यह सवाल भी उत्पन्न हो जाता है कि , आखिर ये महत्वपूर्ण मांग सिर्फ चर्चाओं और बातों तक ही सीमित क्यों है ? हालाँकि मीडिया ने इस बात को वक्त वक्त पर , बार-बार उठाया है, लेकिन जनता की ओर से संगठित का अभाव में ये मांग ठंडे बस्ते में चली जाती रही है। “हर लिहाज से हकदार” होने के बावजूद, नगरोटा सूरियाँ की जनता अपने हक के लिए उस मजबूती से आवाज उठाती दिख रही ? बहरहाल, एक बार फिर यह मांग चर्चा में है। नगरोटा सूरियाँ की जनता का सरकार से सीधा सवाल है कि आखिर उनकी समस्याओं का स्थायी हल क्यों नहीं निकाला जा रहा है ? लोगों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि विकास का विश्वास नगरोटा सूरियाँ को जल्द से जल्द उपमंडल का दर्जा दे दिखाए। ताकि ये इलाका वास्तव में विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।


