कांगड़ा

दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा, उनका सशक्तिकरण हमारा सामाजिक दायित्व : विनय कुमार 

धर्मशाला, उपायुक्त विनय कुमार की अध्यक्षता में आज उपायुक्त कार्यालय धर्मशाला में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आयोजित त्रैमासिक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिले में दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाओं, सुविधाओं और अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी विवेक करोल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  बैठक में दिव्यांगजनों के लिए विशेष दिव्यांग भवन बनाए जाने और जरूरतमंद दिव्यांगजनों को रेहड़ी खोखे  की आवश्यकता पर चर्चा की गई। अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में दिव्यांगजनों के लिए एक समर्पित भवन की स्थापना हेतु संभावित स्थान के लिए स्थान देखा जाए, ताकि उन्हें एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं और परामर्श उपलब्ध हो सकें। अतिरिक्त उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सहायता पेंशन योजनाओं से कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे और पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी एवं त्वरित हो। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि तहसील स्तर पर हर दस्तावेज के लिए लगने वाली फीस की रेट लिस्ट प्रदर्शित की जाए और दिव्यांगजनों को दस्तावेज़ संबंधी कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक विभाग अपने कार्यालयों में व्हीलचेयर रैंप, दिव्यांग अनुकूल शौचालय तथा आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित करे। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि यह सभी विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में दिव्यांगजनहित उपायों को प्राथमिकता से लागू करें।
अतिरिक्त उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाओं की निगरानी नियमित रूप से की जाए और हर त्रैमासिक बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका सशक्तिकरण केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकता भी है। प्रत्येक अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें किसी भी स्तर पर भेदभाव या असुविधा का सामना न करना पड़े। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि सभी विभाग अपने स्तर पर नवाचार करें ताकि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता मिल सके। इसके उपरांत अतिरिक्त उपायुक्त ने राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के तहत स्थानीय स्तरीय समिति की अध्यक्षता की और निःशक्त व्यक्तियों के संरक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की।

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