कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश पुलिस बनेगी अब मॉर्डन

हिमाचल प्रदेश पुलिस अब आधुनिक सुविधाओं से लैस बन रही है। विदेशों की पुलिस सड़कों पर पेट्रोलिंग करके यातायात दरुस्त, कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करती थी। सुख की सरकार ने हिमाचल प्रदेश पुलिस को 66 पेट्रोलिंग वाहन स्पुर्द करके सराहनीय कार्य किया है। उम्मीद है की अब निकतम भविष्य में हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर यातायात नियमों की अवहेलना करने बालों पर शिकंजा कसेगा।गांवों की दुकानों में देर रात तक लगने बाली महफिलें भी बंद होंगी।वाहनों में सवार होकर रील बनाने,हुड़दंग मचाने बालों की ख़ैर नहीं। सड़क हादसों,जाम में फंसने बालों को तत्काल सुविधाएं मिल पाएंगी। पेट्रोलिंग पुलिस का दस्ता कहीं भी अचानक आकर अपराधिक गतिविधयों में शामिल लोगों को पकड़ सकता यह भय होना जरूरी है। राज्य सरकार पुलिस को आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए प्रयासरत है।पुलिस कर्मियों का भोजन भत्ता 7 रुपये से बढ़ाकर कई गुणा अधिक कर दिया है।पुलिस कर्मियों को अब पेट्रोलिंग कारें दिए जाने से कानून व्यवस्था में सुधार होगा। पुलिस कर्मी सिर्फ थानों,चौंकियों तक ही सिमित होकर रह गए थे।वाहनों की पुख्ता व्यवस्था न होने कारण पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही थी। जनता स्वयं अपने वाहनों में पुलिस कर्मचारियों को मदद के लिए ले जाती थी। पेट्रोलिंग बैसे पैदल चलकर किए जाना ही वेहतर समझा जाता है। क्लोज सर्किट (सीसीटीवी)कैमरों से पेट्रोलिंग करके जनता के जान,माल की सुरक्षा की जाती है। भवनों,कम्पनियों में सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा बिकल्प, हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में गाड़ियों सिवाए कानून व्यवस्था सही रखना बहुत बड़ी चुनौती है।पेट्रोलिंग किए जाने के कई तरीके हैँ। आधुनिकता की दौड़ में सुरक्षा को लेकर बहुत सजगता बरती जा रही है। पेट्रोलिंग किए जाने के पांच सेंसिस बताए जाते हैँ। पैदल,गाड़ियों,मोटर साइकल पर सवार होकर निर्धारित लक्ष्य को छूना। उस क्षेत्र का आंकलन करना,कहीं कोई गंदी बदबू,गैस लीकेज,हिट को परखना और हिरिंग चैक करना भी पुलिस कर्मचारियों की सेवाओं गैस शामिल है।विदेशों में निजी कम्पनियों के सुरक्षा कर्मी नियमित पेट्रोलिंग करके जनता की सुरक्षा करते हैँ। पुलिस कर्मचारियों द्वारा की जाने बाली पेट्रोलिंग से कानून व्यवस्था में सुधार होगा। पुलिस कर्मचारियों पर काम का बोझ हमेशा अत्यधिक रहता है। अधिकतर पंचायतें अपनी जिम्मेदारियां सही से नहीं निभा रही हैँ।गावों में छोटे विवाद भी पुलिस थानों,चौकियों में भेज दिए जाते हैँ। राज्य सरकारें पंचायतों का सशक्तीकरण किए जाने का दावा करती हैँ। सच बात यह पंचायत प्रतिनिधि बोट बैंक चलते अपनी शक्तियों का सदुपयोग नहीं कर पाते हैँ। नतीजन पुलिस कर्मचारी मानसिक तनाव में सेवाएं दिए जाने को मजबूर होकर रह जाते हैँ। स्टॉफ की कमी चलते पुलिस कर्मचारियों को लम्बी सेवाएं देनी पड़ती हैँ। पुलिस कर्मचारियों पर काम का बोझ अधिक है। पुलिस विभाग में कर्मचारियों से तीन शिफ्ट में सेवाएं लिए जाने पर राज्य सरकार को फोकस करना चाहिए। 18,42 करोड़ रुपये की लगत से खरीदी गई कारों का सही रख रखाव भी कोई आसान काम नहीं है। राज्य सरकार को अब सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग फीस भी लगानी पड़ सकती है। आगामी भविष्य में चालान दरों में बृद्धि संभव है। प्रोफशनल पुलिस कर्मचारी ही जनता प्रति अपनी जिम्मेदरियां सही निभाकर प्रदेश पुलिस की अच्छ साख बना सकते हैँ। सार्वजानिक स्थलों पर पुलिस को लोगों,पर्यटकों साथ कुशल व्यवहार करना चाहिए।हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने बाबजूद राज्य सरकारें इसे आय का स्त्रोत बनाने में असफल हैँ। पूर्व सरकारों की भांति सुख की सरकार हिमाचल प्रदेश में पर्यटन बिकसित किए जाने पर काम कर रही है। गत तीन बर्षों में आपदाओं चलते प्रदेश पर्यटन पर बिपरीत असर पड़ा है। फोरलेन सड़क निर्माण चलते सड़कों पर चटानें,मलवा,भूसखलन्न की घटनाएं घटित होना आम बात बन गई है। इसी कड़ी चलते पुलिस कर्मचारी असहाय बनकर रह गए थे। देवभूमि आजकल ड्रग्ज, चरस अवैध शराब तस्करी का अड्डा बनकर उभर रहा ऐसा कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है। अपराधिक दर निरंतर बढ़ रही जो चिंता का बिषय है। देश,बिदेश के कुछेक पर्यटक ही देवभूमि में ड्रग्ज का कारोबार करके युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैँ। वाहरी राज्यों के लोग हिमाचल प्रदेश के गांवों में विना अनुमति रहकर सामान बेचकर स्थानीय दुकानदारों का कारोबार चौपट कर रहे हैँ। गांव स्तर पर अब नशा बिक रहा और आम जन मानस अपने कर्तव्यों का पालन सही नहीं कर पा रहा है। बेरोजगारी की चक्की में पिस रहा युवा बर्ग नशों की गर्त में डूबता जा रहा है। स्कूल,कालेजों के छात्र तक नशों का सेवन करते सोशल मीडिया पर चर्चाओ में हैँ। गांवों में गश्त करने बाली पुलिस समक्ष भी बहुत चुनौतियाँ होंगी।पुलिस का काम जनता के जान,माल की सुरक्षा करने अतिरिक्त बहुत जिम्मेदारियां हैँ।सरकारी सम्पति को नुकसान पहुँचाना कई लोगों ने अपनी आदत वना रखी हैँ। सरकारी सम्पति की सुरक्षा करके सरकार की मदद करना भी पुलिस कर्मचारियों की अहम जिम्मेदारी है। दुकानें समय पर खुलकर बंद हों, लोगों का जमाबड़ा रोकना,सड़कें हमेशा खुली,सड़कों किनारे कचरा फेंकने बालों को दबोचना,मालवाहक बाहनों को सबारियां डोने से रोकना,बिना अनुमति सड़कों को खोदकर पाइपें गुजारने से रोकना,बिना डके सड़कों पर रेत, बजरी ले जाने बाले बाहनों को पकड़ना आदि अनेकों जिम्मेदारियों का निर्बहन अब पेट्रोलिग पुलिस को करना पड़ेगा। पेट्रोलिंग पुलिस को अचानक गांवों में गश्त किए जाने पर फोकस करना होगा। पुलिस गाड़ी का एक सायरन बजते ही लोगों को सजग रहने पर मजबूर करेगा। पुलिस दस्ता आधुनिक सुविधाओं से युक्त होने कारण कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारु रखने में बहुत मदद मिलेगी। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से जनता में पुलिस प्रति भय,कानून का पालन करने का जज्बा बनेगा। देवभूमि में 20 नशा तश्करों की 17 करोड़ रुपये की सम्पतियाँ जब्त किए जाना चिंताजनक है।

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