कांगड़ा

सजगता ही डिजिटल गिरफ्तारी बचाव

देश में बढ़ती डिजिटल गिरफ्तारी की घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायलय ने चिंता जताई है। वर्तनमान समय 3 हजार बरिष्ठ नागरिक डिजिटल गिरफ्तारी ठगी का शिकार हुए हैँ।न्यायलय ने अपराध की व्यापकता समझते हुए एजेंसियों को सशक्त बनाने की बकालत की है। डिजिटल अरेस्ट से बचाव केवलमात्र सजगता से पाया जा सकता है। डिजिटल गिरफ्तारी एक बहुत गंभीर चुनौती जिसका नेटवर्क बिदेशों से चलाया जा रहा है। डिजिटल गिरफ्तारी से साइबर ठग देश की जनता के 123 करोड़ रुपये ठग चुके थे। बड़ी हैरानी की बात की हमारी सुरक्षा एजेंसियां ऐसे ठगों को पकड़ने में सफल नहीं हैँ। देश में साइबर ठगों खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कोई कानून नहीं बना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए देश की जनता को कुछ सुरक्षा संबंधित टिप्स दिए हैँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना की कोई भी पुलिस अधिकारी,ईडी,बैंक प्रबंधक किसी व्यक्ति से इस तरह स्मार्ट मोबाइल फोन पर बात करे तो घबराने की जरूरत नहीं है। साइबर ठगी की कोशिश करने बाले को कुछ बताने से पहले रुकें,सोचें और फिर उसकी सबूत सहित साइबर क्राइम ब्रांच में 1930 पर इसकी शिकयत भी दर्ज करवाएं। आजकल साइबर ठग पुलिस आलाधिकारी की बर्दी पहनकर बिडियो काल जरिये कई तरीकों से जनता को डराकर पैसा लूटने की कोशिश कर रहे हैँ। ठग लोगों को कहते की उनका कोई सगा संबंधी किसी जुर्म में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया अगर वह उसे तत्काल पुलिस,ईडी से छुड़ाना चाहते तो पैसे का भुगतान करना पड़ेगा। कभी वह ड्रग्ज का पार्सल मिलने से लोगों को डराने की कोशिश कर करते हैँ। डिजिटल अरेस्ट करने बाले बड़ी आसानी से जनता की डिटेल कैसे हासिल कर रहे सोचने बाली बात है। आधार कार्ड एक पहचान पत्र हो सकता है। मगर प्रत्येक सरकारी काम में आधार कार्ड नंबर का स्लग्न किए जाना ही साइबर अपराध को बढ़ाबा दे रहा है। सोशल मीडिया अकाउंट,बैंक खातों और गैस,बिजली कनेक्शन तक में आधार कार्ड नंबर को आनलाइन जोड़ा जा रहा है।सोशल मीडिया दौर में आजकल बच्चों सहित बजुर्ग भी उसके खासे दीवाने हैँ। सोशल मीडिया पर सेल्फी डालना,इंस्टाग्राम पर कई तरह की रील डालना मानों लोगों में मनोरोग तैयार हो गया है।सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल फोन नंबर की जरूरत रहती है। बिना आधार कार्ड कोई भी दूर संचार कम्पनी लोगों को सीम कार्ड नहीं देती है। सोशल मीडिया पर लोग सुरक्षा को ताक पर रखकर कई ऐसी पोस्ट,रील बायरल कर देते जिसे साइबर ठग अपनी कमाई का जरिया बना लेते हैँ। सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही अधिकतर फोटो का साइबर ठग गलत इस्तेमाल करके अपने मनसूबों को पुरा कर रहे हैँ। बढ़ती अपराधिक घटनाओं को लेकर अब हर राज्य बेहतरीन सिक्योरिटी के प्रति सजग होता जा रहा है। साइबर ठग लोगों के व्हाट्सअप काल हैक करके उनके सगे,संबधियों को ठगने का ताना बाना बुन रहे हैँ। ठग जनता को मोबाइल सीम कार्ड अपग्रेड किए जाने का हवाला देकर उनसे ठगी करने में प्रयासरत है। कुछेक दूर संचार कम्पनियों के माध्य्म से स्मार्ट मोबाइल फोन पर अश्लील लिंक अचानक ओपन होकर क्रिप्टो करेंसी में पैसा लगाने की मांग कर रहे हैँ। इस गोरख धंधे से एक बात साफ होती की साइवर ठग युवा पीढ़ी को न्यूड फोटो दिखाकर उन्हें लूटने में मशगूल हैँ। क्रिप्टो करेंसी में आम जनमानस सहित सरकारी विभागों के कर्मचारी भी ठगे जा चुके हैँ।क्रिप्टो करेंसी फर्जिबाड़े के आकाओं को पुलिस,सुरक्षा एजेंसियां पकड़ने में असफल रही हैं। विदेशों में बैठकर चलाए जा रहे इस गोरख धंधे में हिमाचल प्रदेश के हजारों लोग ठगे जा चुके हैँ। भारत में अश्लील साइट तत्काल प्रभाव से बंद किए जाना बहुत जरूरी है। न्यूड फोटो जरिये सोशल मीडिया में लोगों को ठगने का गोरख धंधा भी चल रहा है। साईबर ठग लोगों को दूर संचार कम्पनियों का कोड डायल करने की बात करते हैँ। ऐसा करने पर उक्त व्यक्ति की तमाम टेलीफोन काल का हवाला ठगों के पास चला जाता है।वह दिन रात ऐसे भोले भाले लोगों को लूटने का प्रयास करते हैँ। समाज में बढ़ती चोरियां, डकैती,लूटपाट और हत्याओं से पुलिस को हमेशा अलर्ट रहना ही पड़ेगा।संचार क्रांति आने के कारण इंटरनेट फ़्रॉड की बारदाते भी बड़ी हैं। किसी के अकॉउंट से अनजान ब्यक्ति बड़ी ही आसानी से पैसे निकालकर रफूचक्कर हो रहे हैं। एटीएम मशीनें तोड़कर पैसे चुराने में भी चोर पुलिस के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। पुलिस से कहीं ज्यादा चोर प्रॉफेसनल बन चूके जो चोरियों की बारदात को इस तरह अंजाम देते कि पुलिस सिवाए माथा पीटने के कुछ नहीं कर पा रही है।दूसरे ब्यक्ति के एटीएम कार्ड से पैसे निकालने में भी हैकर काफी माहिर हो चुके हैं। चोरों के मनसूबे भी नाकाम साबित किए जा सकते, अगर ग्राहक जागरूकता से काम लें। बैंक खाते की सुरक्षा के लिए सदैव एटीएम कार्ड खुद ही इस्तेमाल करें और एटीएम पिन नo डालते समय गोपनीयता रखनी चाहिए,एटीएम मशीन के पास एक समय में एक ही आदमी खड़ा होना चाहिए,मशीन पर भीड़ की बजाए, क्यु लाइन ही फॉलो करना सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होता है। अगर एटीएम कार्ड रीडर की जगह कुछ अनाधिकृत डिवाइस जैसे मैग्नेट,कैमरा बगैरा चिपका मिले तो ट्रांसेक्शन करने की बजाए तुरंत बैंक स्टाफ को सूचित करना ही एक जागरूक ग्राहक की पहचान होनी चाहिए। जनता को ऐसी अनजान फोन कॉल को अनसुना करके अपनी कोई भी जानकारी देने से बचते हुए पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस और जनता के आपसी सहयोग से ऐसी बारदतों पर अंकुश लगाया जा सकता है। अधिकांश जनता पुलिस की मदद करने से पीछे हटती नतीजन समाज में ऐसी घटनाओं की बडौतरी तेजी से हो रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए जरूरत पुलिस ऑफिसरों का अत्यधिक प्रॉफेसनल होना। जनता के जान, माल की रक्षा करना ही एक पुलिस ऑफिसर की अहम जिमेदारी होती है। केवलमात्र जवानों की टोपियों का रंग बदल दिए जाने से उनकी जरूरतें पूरी नही हो जाती हैं। जब तक पुलिस ऑफिसर को अच्छा वेतनमान और दूसरी सहुलयतें नहीं मिलें तब तक उनसे सही ड्यूटी की आस रखना एक सपना लगता है। एक पुलिस जबान की अच्छी टर्न आउट से ही उसके ब्यक्तितब का पता चलता है। बिना शेप,बाहर निकले हुए पेट ,क्रोधित मूड,सोम रस पिए हुए,मोबाइल पर सदैव ब्यस्त दिखने बाले पुलिस ज़बान को जनता पसंद नहीं करती है। ऑफिसर ड्यूटी समय में मोबाईल का इस्तेमाल करना पसंद नही करता है। मगर सच्चाई इसके विपरीत है।देवभूमि की पुलिस को देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस का अवार्ड भले ही मिल गया हो। मग़र पुलिस फोर्स के जबानों को मिलने बाली सुविधाएं नाममात्र की ही नजर आती हैं। जब तक पुलिस ऑफिसर अंतरात्मा से खुश होकर अपनी सेवाएं नहीं देता तब तक लोगों के जान, माल की सही रक्षा नहीं की जा सकती है। नए भर्ती होने बाले पुलिस जबान को जो बेतनमान दिया जा रहा बो ऊंट के मुंह में जीरा डालने बाली बात के बराबर है। पुलिस ऑफिसरों को जब तक सभी सुविधाओं से लैस नही किया जाता तब तक सर्वश्रेष्ठ पुलिस का दर्जा सिर्फ कागजों में दिया जाना बेहतर होगा। पुलिस फोर्स की जमीनी हकीकत कुछ और नजर आती अगर गहराई से जांच की जाए।

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